Navratri 2026: नवरात्रि में ऐसे करें मां दुर्गा की स्तुति, सप्तश्लोकी दुर्गा पाठ का जानें महत्व
नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और स्तुति का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में देवी की आराधना करने से मन को शांति, आत्मबल और सकारात्मकता मिलती है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र जाप, दुर्गा चालीसा और सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ करते हैं।
नवरात्रि में किस पाठ का है विशेष महत्व?
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती और सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ विशेष रूप से प्रचलित है। सप्तश्लोकी दुर्गा में सात श्लोक हैं, जिनके माध्यम से मां भगवती की महिमा का गुणगान किया जाता है। जो भक्त कम समय में मां की स्तुति करना चाहते हैं, वे अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार इस पाठ को कर सकते हैं।
कैसे करें मां दुर्गा की स्तुति?
1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. पूजा स्थल पर मां दुर्गा के सामने दीपक जलाएं।
3. फूल और अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा सामग्री अर्पित करें।
4. शांत मन से मां दुर्गा के मंत्रों का जाप या स्तुति का पाठ करें।
5. अंत में मां दुर्गा की आरती करके परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
मां दुर्गा की स्तुति का मंत्र
मां दुर्गा की आराधना के लिए इस प्रसिद्ध श्लोक का पाठ किया जा सकता है:
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते॥
इसका भावार्थ है कि हे मां नारायणी! आप सभी मंगलों में मंगलकारी, कल्याण करने वाली और अपने भक्तों को शरण देने वाली हैं। आपको बार-बार प्रणाम है।
क्या हैं पाठ के लाभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा की स्तुति करने से भक्तों को मानसिक शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक प्रेरणा मिलती है। हालांकि, धार्मिक लाभ आस्था और परंपराओं से जुड़े हैं; इन्हें निश्चित परिणाम की गारंटी के रूप में नहीं देखना चाहिए।
निष्कर्ष: नवरात्रि में मां दुर्गा की स्तुति अपनी श्रद्धा और सुविधानुसार करें। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण है भक्ति, एकाग्रता और सकारात्मक भाव।
