होर्मुज संकट के बीच भारत की नई रणनीति, रिफाइनर्स ने बदला तेल सप्लाई का तरीका
India Oil Supply: होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय तेल कंपनियों ने कच्चे तेल की सप्लाई बनाए रखने के लिए अपनी रणनीति में बदलाव किया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिफाइनर्स अब फारस की खाड़ी के भीतर मौजूद तेल को लेने के लिए खुद टैंकर किराए पर लेने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
खुद टैंकर किराए पर ले रहे रिफाइनर्स
पहले भारतीय रिफाइनर्स कई मामलों में खाड़ी के उत्पादकों और अंतरराष्ट्रीय ट्रेडर्स पर निर्भर थे। इन कंपनियों के जरिए तेल भारत तक पहुंचता था और इसके लिए अतिरिक्त शिपिंग लागत भी चुकानी पड़ती थी।
अब Indian Oil, Reliance Industries, Bharat Petroleum और HPCL-Mittal Energy जैसी कंपनियां कुछ कच्चे तेल की खरीद FOB आधार पर कर रही हैं। इस व्यवस्था में तेल की ढुलाई और जहाज की व्यवस्था खरीदार को खुद करनी होती है।
इराकी तेल की खरीद बढ़ी
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिफाइनर्स ने हाल में इराकी क्रूड की कुछ खरीद FOB आधार पर की है। इससे कंपनियों को शिपिंग और लॉजिस्टिक्स पर ज्यादा नियंत्रण मिल सकता है।
इराक की सरकारी तेल कंपनी SOMO ने अक्टूबर के कॉन्ट्रैक्ट के लिए क्षेत्रीय बेंचमार्क की तुलना में आकर्षक कीमतों पर कुछ आपूर्ति की पेशकश भी की है।
होर्मुज से तेल प्रवाह में सुधार
इस रणनीति में बदलाव ऐसे समय आया है जब हाल के महीनों में होर्मुज से तेल का प्रवाह पहले की तुलना में सुधरा है। सितंबर में भारत की ओर जाने वाले होर्मुज मार्ग के कच्चे तेल का औसत प्रवाह करीब 13 लाख बैरल प्रतिदिन बताया गया, जो फरवरी के बाद सबसे ऊंचे स्तरों में शामिल है।
सप्लाई स्रोतों में विविधता पर जोर
भारत पहले से ही अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदता रहा है। हालिया बाजार परिस्थितियों में रिफाइनर्स रूस, इराक, UAE और अन्य स्रोतों से उपलब्ध विकल्पों पर भी नजर रख रहे हैं। इससे किसी एक मार्ग या सप्लायर पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष: होर्मुज संकट के बीच भारतीय रिफाइनर्स का टैंकर खुद किराए पर लेकर कच्चा तेल उठाने का कदम सप्लाई चेन और लागत पर ज्यादा नियंत्रण हासिल करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, शिपिंग, सुरक्षा और बीमा लागत जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
