Raghav Chadha Voter List: दिल्ली की वोटर लिस्ट में राघव चड्ढा का नाम, AAP ने उठाए सवाल

 Raghav Chadha Voter List Controversy: दिल्ली की वोटर लिस्ट में राघव चड्ढा का नाम, AAP ने उठाए सवाल


नई दिल्ली: बीजेपी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम दिल्ली की मतदाता सूची में शामिल होने को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं, चड्ढा की ओर से कहा गया है कि उन्होंने मतदाता पंजीकरण से जुड़े नियमों का पालन किया है।


दिल्ली की वोटर लिस्ट में कैसे आया नाम?


चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान राघव चड्ढा का नाम दिल्ली के चुनावी रोल में दर्ज किया गया है। इस घटनाक्रम के बाद AAP ने नाम शामिल किए जाने की प्रक्रिया और इसके आधार को लेकर सवाल उठाए हैं।


मामला इसलिए भी राजनीतिक रूप से चर्चा में है क्योंकि चड्ढा पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और 2026 में बीजेपी में शामिल होने से पहले वह लंबे समय तक आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे थे।


AAP ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब


आम आदमी पार्टी का कहना है कि राघव चड्ढा का नाम दिल्ली की मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया जाना चाहिए। पार्टी ने चुनाव आयोग से इस संबंध में जानकारी मांगी है।


AAP और बीजेपी के बीच यह मुद्दा अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का रूप लेता दिखाई दे रहा है। हालांकि, मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का प्रावधान भी मौजूद है। दिल्ली की मौजूदा SIR प्रक्रिया में ड्राफ्ट रोल के बाद दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि 30 सितंबर 2026 तक निर्धारित है।


राघव चड्ढा का क्या कहना है?


राघव चड्ढा ने अपनी ओर से कहा है कि उन्होंने मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए निर्धारित नियमों का पालन किया है। ऐसे में अब विवाद का केंद्र यह है कि दिल्ली की मतदाता सूची में उनका नाम किस प्रक्रिया और दस्तावेजों के आधार पर शामिल किया गया।


क्यों अहम है यह मामला?


मतदाता सूची में नाम का होना केवल मतदान के अधिकार से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता रिकॉर्ड की शुद्धता से भी जुड़ा है। यही वजह है कि चड्ढा के नाम को लेकर उठा विवाद राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


फिलहाल इस मामले में चुनाव आयोग की ओर से मिलने वाला आधिकारिक स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण होगा। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नाम शामिल करने की प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई है या यह सामान्य मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया का हिस्सा है।