सरकार बदलने की मांग पर प्रशांत भूषण का बयान, लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर उठाए सवाल
नई दिल्ली में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सरकार बदलने की मांग और लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार के खिलाफ आवाज उठाना और सत्ता परिवर्तन की मांग करना अपने आप में अपराध नहीं है।
15 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने यह बयान दिया। यह मामला चुनाव प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच सामने आया है।
प्रशांत भूषण का कहना है कि नागरिकों को सरकार की नीतियों से असहमति जताने और लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव की मांग करने का अधिकार है। उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।
वहीं, भाजपा की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावों के माध्यम से सरकार बदलने की प्रक्रिया पर जोर दिया गया है।
इस घटनाक्रम ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण विरोध और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
