नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 62वें म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमेरिका की वैश्विक भूमिका में बदलाव और चीन के बढ़ते प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
जयशंकर के मुताबिक, अमेरिका ने अपनी पसंद से खुद को पहले की तुलना में अधिक अकेली स्थिति में ला दिया है। वहीं चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण वैश्विक प्रतिस्पर्धा का दायरा भी बढ़ रहा है।
अपने हितों के अनुसार साझेदारी बना रहे देश
विदेश मंत्री ने कहा कि उभरती और मध्यम शक्तियां अब अपने हितों को ध्यान में रखते हुए रणनीति बना रही हैं। ये देश जोखिम कम करने, निर्भरता घटाने और अलग-अलग देशों के साथ नए साझेदारी विकल्प तलाशने पर जोर दे रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि किसी देश के साथ सहयोग के लिए हर मुद्दे पर पूरी सहमति होना जरूरी नहीं है। साझा हित वाले क्षेत्रों में देश साथ मिलकर काम कर सकते हैं। भारत की विदेश नीति में विभिन्न साझेदारियों और बहुपक्षीय मंचों के साथ सहयोग इसी व्यापक बदलाव का हिस्सा है।
चीन का बढ़ता प्रभाव भी अहम मुद्दा
जयशंकर ने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था की दूसरी प्रमुख विशेषता के रूप में चीन के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख किया। उनके अनुसार, अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ दुनिया के कई देश अपनी आर्थिक और रणनीतिक निर्भरता को लेकर नए विकल्प तलाश रहे हैं।
नोट: यह लेख उपलब्ध रिपोर्टों और जयशंकर के सार्वजनिक वक्तव्य के आधार पर स्वतंत्र भाषा में तैयार किया गया है।
