Hormuz Strait Crisis: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने का असर भारत पर भी पड़ रहा है। 20 अगस्त 2026 तक हॉर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं हुई है। ईरान इसे बंद रखने की बात कह रहा है, जबकि अमेरिका की ओर से इसके खुले होने का दावा किया गया है। ऐसे में इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने वाले तेल और LNG की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
भारत ने तेल की सप्लाई के लिए बदले विकल्प
भारत अपनी जरूरत के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा आयात करता है। हॉर्मुज संकट के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने रूस, लैटिन अमेरिका और अन्य गैर-खाड़ी स्रोतों से खरीद बढ़ाई है।
जुलाई 2026 में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता रहा। Reuters के मुताबिक उस महीने भारत के कुल क्रूड आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 50.83% रही। वहीं अप्रैल-जुलाई के दौरान रूस की हिस्सेदारी करीब 43.25% थी।
वेनेजुएला से भी बढ़ी कच्चे तेल की सप्लाई
हॉर्मुज संकट के बीच भारत ने लैटिन अमेरिकी देशों से भी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है। 20 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में वेनेजुएला से भारत के क्रूड आयात में तेज बढ़ोतरी हुई और वह भारत का चौथा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया। Kpler के शिप-ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार वेनेजुएला से आपूर्ति करीब 4.44 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंची।
भारत को रूस और वेनेजुएला के अलावा अमेरिका, ब्राजील तथा अन्य देशों से भी कच्चा तेल मिलता है। इसका उद्देश्य किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम करना है।
गैस के लिए भारत किन देशों पर निर्भर है?
कच्चे तेल की तुलना में LNG यानी Liquefied Natural Gas के मामले में हॉर्मुज संकट का असर ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। भारत को लंबे समय से कतर से LNG की महत्वपूर्ण आपूर्ति मिलती रही है।
हालांकि, अगस्त में Petronet LNG ने सितंबर की कतर LNG सप्लाई को लेकर अनिश्चितता जताई है। Reuters के अनुसार भारत इस कमी को पूरा करने के लिए ओमान, अमेरिका, नाइजीरिया और अंगोला जैसे स्रोतों से LNG लेने की कोशिश कर रहा है।
इसके अलावा भारत को ऑस्ट्रेलिया के Gorgon प्रोजेक्ट से भी LNG मिल रही है। Petronet को 2026 में वहां से करीब 6 लाख टन LNG मिलने की उम्मीद है।
क्या भारत में तेल और गैस की कमी हो जाएगी?
फिलहाल स्थिति को सीधे तौर पर देश में तेल-गैस की तत्काल कमी के रूप में देखना सही नहीं होगा। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता बढ़ाने की कोशिश की है। लेकिन लंबे समय तक हॉर्मुज में व्यवधान रहने पर आयात लागत, शिपिंग खर्च और वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
19 अगस्त को Brent crude करीब 91.62 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। बाजार में हॉर्मुज से जुड़ी अनिश्चितता इसका एक महत्वपूर्ण कारण बनी हुई है।
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
भारत के लिए चुनौती केवल तेल की उपलब्धता नहीं, बल्कि सही कीमत पर लगातार आपूर्ति बनाए रखना है। रूस से बढ़ी खरीद और वेनेजुएला जैसे वैकल्पिक स्रोतों ने कुछ राहत दी है, जबकि LNG के लिए अमेरिका, ओमान, नाइजीरिया, अंगोला और ऑस्ट्रेलिया जैसे स्रोत महत्वपूर्ण हो रहे हैं।
आने वाले दिनों में हॉर्मुज से जहाजों की आवाजाही, पश्चिम एशिया का तनाव और वैश्विक तेल-गैस बाजार की स्थिति भारत की ऊर्जा लागत पर बड़ा असर डाल सकती है।
नोट: यह खबर उपलब्ध ताजा रिपोर्टों और सार्वजनिक आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति तेजी से बदल सकती है।