पूनावाला ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सड़क, सरकारी स्कूल, स्वास्थ्य सेवाओं, साफ हवा और स्वच्छ पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि आम वेतनभोगी वर्ग इनकम टैक्स के साथ GST, टोल, सेस और ईंधन जैसे विभिन्न करों का भुगतान करता है, इसलिए उसे बेहतर सार्वजनिक सेवाओं की उम्मीद रखना स्वाभाविक है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब बच्चों की पढ़ाई और परिवार के इलाज के लिए बड़ी संख्या में लोग निजी स्कूलों और अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं, तो टैक्स के बदले मिलने वाली सरकारी सुविधाओं की गुणवत्ता पर चर्चा क्यों न हो।
पूनावाला ने वेतनभोगी मिडिल क्लास के लिए व्यक्तिगत आयकर में राहत की मांग भी उठाई है। हालांकि, सरकार की ओर से पहले ही नए टैक्स रिजीम में मिडिल क्लास के लिए आयकर में बदलाव किए जा चुके हैं। 2025 के बजट में नई व्यवस्था के तहत ₹12 लाख तक की सामान्य आय पर आयकर देनदारी शून्य करने की घोषणा की गई थी, जबकि वेतनभोगियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ यह सीमा ₹12.75 लाख बताई गई थी।
अब बहस इस सवाल पर है कि क्या टैक्स देने वाले मिडिल क्लास को उसके योगदान के अनुपात में बेहतर सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं मिल रही हैं?
आपकी राय क्या है?
👍 टैक्सपेयर्स को बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए
🙏 मिडिल क्लास पर टैक्स का बोझ कम होना चाहिए
😠 पार्टी से अलग होने के बाद ही ये सवाल क्यों उठे?
😮 टैक्स देने के बावजूद निजी सेवाओं पर निर्भरता क्यों?