बेंगलुरु का एक चर्चित हत्याकांड आज भी देश के सबसे हैरान करने वाले अपराध मामलों में गिना जाता है। शकीरे खलीली, जो एक प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखती थीं, 28 अप्रैल 1991 को अचानक लापता हो गई थीं। उनके पति मुरली मनोहर मिश्रा उर्फ स्वामी श्रद्धानंद ने लोगों को बताया कि वह विदेश गई हैं। करीब तीन साल तक यही कहानी चलती रही।
बेटी को हुआ शक और शुरू हुई जांच
शकीरे की बेटी एस्मेथ खलीली को मां के अचानक गायब होने की बात पर संदेह था। पुलिस जांच आगे बढ़ी और बेंगलुरु स्थित बंगले के परिसर में खुदाई कराई गई। मई 1994 में जमीन के नीचे से एक लकड़ी का ताबूत बरामद हुआ, जिसके बाद मामले का रहस्य खुल गया।
जांच में सामने आया कि ताबूत में शकीरे के अवशेष मिले थे। पुलिस के अनुसार, उनकी हत्या संपत्ति से जुड़े लालच के कारण की गई थी। इस मामले ने उस दौर में पूरे देश का ध्यान खींचा।
संपत्ति को लेकर सामने आया विवाद
मामले की जांच में यह आरोप सामने आया कि श्रद्धानंद की नजर शकीरे की संपत्ति पर थी। रिपोर्टों के अनुसार, शकीरे के पास बेंगलुरु, ऊटी और मध्य प्रदेश में बड़ी संपत्तियां थीं। हत्या के पीछे संपत्ति हासिल करने की साजिश को प्रमुख वजह माना गया।
सुप्रीम कोर्ट ने बदली सजा
मामले में ट्रायल कोर्ट और कर्नाटक हाई कोर्ट ने श्रद्धानंद को मौत की सजा सुनाई थी। बाद में 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। अदालत के फैसले में ऐसी उम्रकैद का प्रावधान किया गया जिसमें रिहाई की संभावना नहीं थी।
शकीरे खलीली केस को भारतीय न्यायिक इतिहास के चर्चित मामलों में माना जाता है। करीब तीन साल तक छिपा रहा यह रहस्य अंततः पुलिस जांच और बंगले के परिसर में हुई खुदाई के बाद सामने आया।
नोट: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों के आधार पर स्वतंत्र शब्दों में तैयार किया गया है। किसी स्रोत की भाषा या सामग्री को हूबहू कॉपी नहीं किया गया है।