रांची | Alpha News: झारखंड हाईकोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसले में गुमला की रहने वाली प्रमिला देवी को एक पुराने नक्सल मामले में बरी कर दिया है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए यह स्पष्ट किया कि केवल किसी नक्सली की पत्नी होने या घटनास्थल पर मौजूद होने मात्र से ही किसी को अपराधी नहीं माना जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला लगभग 19 साल पुराना है। प्रमिला देवी पर नक्सल गतिविधियों से जुड़े होने का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद उन्हें निचली अदालत ने दोषी करार दिया था। इस मामले में प्रमिला देवी ने अपनी सजा के तौर पर 7 साल और 8 महीने जेल में बिताए थे।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष (Prosecution) की दलीलों पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि:
अपराध का अभाव: अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि महिला प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी गैरकानूनी या नक्सली गतिविधि में शामिल थी।
निजी संबंध: कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि किसी व्यक्ति का नक्सली के साथ वैवाहिक संबंध (पत्नी होना) उसे स्वतः ही अपराधी नहीं बना देता।
साक्ष्यों की कमी: घटनास्थल पर मौजूदगी को ही अपराध का आधार नहीं बनाया जा सकता, जब तक कि उस व्यक्ति की संलिप्तता का कोई ठोस सबूत न हो।
न्याय की जीत
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत है जो अक्सर परिस्थितियों के कारण गलत कानूनी कार्रवाई का शिकार हो जाते हैं। 7 साल से अधिक समय जेल में काटने के बाद, हाईकोर्ट के इस फैसले ने प्रमिला देवी को निर्दोष करार दिया है।
